विस्तृत उत्तर
पाँच शिव मंत्रों का महत्व शिवस्वरूप से सीधे जुड़ा बताया गया है। विष्णु ने ईशान, तत्पुरुष, अघोर, सद्योजात और वामदेव मंत्रों को प्राप्त करके उनका जप आरम्भ किया। इसके बाद महादेव का दिव्य स्वरूप दिखता है जिसमें ईशान मंत्र मुकुटरूप, तत्पुरुष मंत्र मुखरूप, अघोर मंत्र करुणामय हृदयरूप, वामदेव मंत्र सदा कल्याणकर गुह्यस्थानरूप और सद्योजात मंत्र चरणरूप कहा गया है। इस प्रकार मंत्र केवल जप के शब्द नहीं, बल्कि महादेव के विश्वरूप अंगों से संबद्ध हैं।
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