विस्तृत उत्तर
पंचपर्वा अविद्या वह पाँच प्रकार का अज्ञान है जिसे ब्रह्मा जी ने सृष्टि के प्रारंभ में बनाया। इसमें तामिस्र, अंध-तामिस्र, तमस्, मोह और महा-मोह बताए गए हैं। तामिस्र जीव में ईर्ष्या और क्रोध उत्पन्न करता है। अंध-तामिस्र शरीर को ही सब कुछ मानकर मृत्यु का भय पैदा करता है। तमस् आत्मस्वरूप के विस्मरण को दर्शाता है। मोह शरीर और परिवार के प्रति ममता है। महा-मोह भौतिक भोग-विलास की अंधी दौड़ है। यही पंचपर्वा अविद्या जीव को देह, मन और विषयों में बाँधती है। हंस अवतार का उपदेश इसी अज्ञान को काटने के लिए है।
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