विस्तृत उत्तर
आगम शास्त्र' के अनुसार, शिवलिंग की वेदी (योनिका, जहाँ से अभिषेक-जल बहता है) का मुख 'उत्तर दिशा' की ओर होना चाहिए।
पारद शिवलिंग स्थापना में योनिका का मुख किस दिशा में होना चाहिए को संदर्भ सहित समझें
पारद शिवलिंग स्थापना में योनिका का मुख किस दिशा में होना चाहिए का सबसे सीधा सार यह है: आगम शास्त्र के अनुसार पारद शिवलिंग की योनिका (जहाँ से अभिषेक-जल बहता है) का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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पारद शिवलिंग पूजा में साधक किस दिशा में बैठे?
आगम शास्त्र के अनुसार पारद शिवलिंग की पूजा में साधक को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
पारद शिवलिंग की वेदी किस धातु की होनी चाहिए?
पारद शिवलिंग की वेदी केवल तांबा, पीतल या चांदी की होनी चाहिए — लोहे/स्टील की वेदी तामसिक मानी जाती है और वर्जित है।
पारद शिवलिंग की स्थापना कैसे करते हैं?
पारद शिवलिंग को घर के पूजा-गृह में लकड़ी की चौकी पर पीतल/तांबे/चांदी की वेदी पर स्थापित करें। योनिका का मुख उत्तर और साधक का मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए।
पारद शिवलिंग को 'स्वयं-सिद्ध' क्यों कहते हैं?
पारद शिवलिंग को 'स्वयं-सिद्ध' इसलिए कहते हैं क्योंकि पारद भगवान शिव का 'वीर्य' (जीव-तत्व) माना गया है — यह 'जीवंत धातु' स्वाभाविक रूप से दिव्य शक्ति से युक्त है।
पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा जरूरी है क्या?
पारद शिवलिंग 'स्वयं-सिद्ध' है — लेकिन विशिष्ट साधनाओं की सफलता के लिए 'पशुपति मंत्रों' या 'रुद्राभिषेक मंत्रों' से प्राण-प्रतिष्ठा और चैतन्य कराना आवश्यक है।
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