विस्तृत उत्तर
भगवान का सोलहवाँ अवतार परशुराम के रूप में बताया गया है। पाठ कहता है कि जब भगवान ने देखा कि राजा लोग ब्राह्मणों के द्रोही हो गए हैं, तब वे क्रोधित हुए। परशुराम अवतार में उन्होंने पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियों से शून्य कर दिया। यह वर्णन संक्षिप्त है और परशुराम की पूरी कथा नहीं दी गई, पर अवतार का कारण स्पष्ट है: शासन-शक्ति का ब्राह्मण-द्रोह और धर्म-विरोधी रूप लेना। इस आधार पर परशुराम अवतार धर्म-संतुलन और अधर्मी राजसत्ता के दमन से जुड़ा हुआ है। भगवान यहाँ धर्म की रक्षा के लिए दंडरूप शक्ति के रूप में प्रकट होते हैं।
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