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विस्तृत उत्तर
प्राकृत सर्ग प्रारम्भ के तीन सर्ग बताए गए हैं। पहला सर्ग महत्तत्त्वादि का है, दूसरा भौतिक सर्ग है जो भूततन्मात्राओं का है, और तीसरा ऐन्द्रिय सर्ग है। पाठ में स्पष्ट कहा गया है कि ये बुद्धिपूर्वक उत्पन्न हुए तीन सर्ग प्राकृत सर्ग हैं। नौवाँ कौमार सर्ग प्राकृत और वैकृत दोनों कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 5, PDF पृष्ठ 29, श्लोक 6-8
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