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विस्तृत उत्तर
प्रकृति को लिंग इसलिए कहा गया है क्योंकि प्रधान प्रकृति शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से संयुक्त बताई गई है। वही उत्तम लिंग कहलाती है। लिंगतत्त्व को जगत् का उत्पत्तिस्थान, पंचभूतात्मक, स्थूल, सूक्ष्म और जगत् का विग्रह कहा गया है। यह प्रकृति शिव से प्रकाशित और निर्गुण शिव से उत्पन्न मानी गई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 20, श्लोक 1-4
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