विस्तृत उत्तर
प्रलय जल में विष्णु का स्वरूप अत्यन्त व्यापक बताया गया है। वे योगात्मा, निर्मल, उपद्रवरहित, हजार सिरों, हजार नेत्रों, हजार पैरों और हजार भुजाओं से युक्त कहे गए हैं। वे विश्वात्मा, सब कुछ जानने वाले, देवताओं और संसार की उत्पत्ति करने वाले, नारायण, सर्वात्मा और सत्-असत् से युक्त हैं। ब्रह्मा ने उन्हें जल-स्थित कमल पर सोते हुए देखा और उनकी माया से मोहित हुए। बाद में वे शेषनागरूपी शय्या से उठकर ब्रह्मा से मधुर वाणी में बोले।
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