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विस्तृत उत्तर
प्रलयकाल में जलराशि में नारायणरूप में शयन करनेवाले सदाशिव ही बताए गए हैं। यह बात गुणों के आधार पर सदाशिव से ब्रह्मा, विष्णु और कालरुद्र के प्रादुर्भाव वाले वर्णन के साथ आती है। रजोगुण से ब्रह्मारूप, सत्त्व से विष्णुरूप और तमोगुण से कालरुद्ररूप प्रादुर्भाव के बाद अंत में उन्हीं सदाशिव का नारायणरूप शयन बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 2, PDF पृष्ठ 16, श्लोक 7
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