विस्तृत उत्तर
प्रतिभा सिद्धि प्रत्येक पदार्थ के विषय में अवबोध कराने वाली वृत्ति है। पाठ में प्रतिभासिका वृत्ति को प्रतिभा कहा गया है, जो अतीत, अनागत, सूक्ष्म, अदृष्ट, दूरस्थ और अत्यन्त समीप अर्थात् वर्तमान पदार्थों का सर्वदा और सर्वत्र ज्ञान देती है। इसे पहली सिद्धि कहा गया है। लेकिन यह स्वल्प सिद्धियों में आती है और इनके आकर्षण से मुक्त मुनि को आगे अणिमादि सिद्धियाँ अभिलषित सिद्धि प्रदान करती हैं।
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