विस्तृत उत्तर
ऋषि भृंगी भगवान शिव के परम भक्त थे। वे केवल भगवान शिव की उपासना करते थे और उन्होंने माता पार्वती की पूजा या परिक्रमा करने से इनकार कर दिया।
जब भृंगी ने केवल शिव की परिक्रमा करने का हठ किया, तब देवी पार्वती के मान की रक्षा हेतु, शिव ने स्वयं को पार्वती के साथ एकाकार कर अर्धनारीश्वर रूप धारण कर लिया।
भृंगी ने तब भी भ्रमर (भृंगी) रूप धारण कर दोनों के बीच से निकलने का प्रयास किया।





