विस्तृत उत्तर
जब भृंगी ने अर्धनारीश्वर रूप में भी भ्रमर (भृंगी) रूप धारण कर दोनों के बीच से निकलने का प्रयास किया, तो शिव ने उन्हें अपूर्णता का दंड दिया।
किंतु पार्वती के अनुनय पर उन्हें संबल हेतु तीसरी टांग दी।
अंततः, भृंगी ऋषि ने क्षमा मांगकर अर्धनारीश्वर स्वरूप की ही परिक्रमा की।



