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विस्तृत उत्तर
सगर्भ और अगर्भ प्राणायाम में फर्क जप के आधार पर बताया गया है। जपसहित प्राणायाम सगर्भ कहलाता है और जपरहित प्राणायाम अगर्भ कहा जाता है। इसके बाद प्राणवायु की दुराधर्षता को हाथी, शरभ और सिंह से तुलना करके समझाया गया है। अभ्यास और युक्ति से जैसे बलवान पशु वश में आते हैं, वैसे ही प्राणवायु भी नियमपूर्वक अभ्यास से समत्वभाव को प्राप्त होती है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 46, श्लोक 51
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