विस्तृत उत्तर
सनकादि कुमार ब्रह्मा के पुत्र रूप में उत्पन्न दिव्य कुमार थे। जब ब्रह्मा ने शून्य लोकों को देखकर 'मैं कौन हूँ' विचार किया, तब एक हजार वर्ष के बाद सनत्कुमार, ऋभु, सनक, सनातन और सनन्दन नामक कुमार प्रकट हुए। वे यतियों के पूर्वज, यतिशील, प्रियदर्शन, अपने तेज से समस्त भुवनों को व्याप्त करने वाले और कमलपत्र जैसे विशाल नेत्रों वाले बताए गए हैं। सनत्कुमार और ऋभु ऊर्ध्वरेता थे। वे बुद्धि और इन्द्रियों से अगोचर, विशिष्ट ज्ञान से सम्पन्न और तीन तापों से रहित थे।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक




