📖
विस्तृत उत्तर
संयमी व्यक्ति अनासक्त रहता है और जन्म-मृत्यु के भय से सावधान होकर विषयभोगों की नश्वरता पर विचार करता है। पाठ में कहा गया है कि सभी ओर से प्रलोभन दिए जाने पर भी जो अलुब्ध बना रहता है, वह संयमी कहलाता है। इसलिए संयम केवल बाहरी नियंत्रण नहीं, बल्कि भोगों की अस्थिरता समझकर लोभ से बचना और आसक्ति न रखना है।
📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 24
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





