विस्तृत उत्तर
शब्दमय शिव रूप वह दिव्य रूप है जिसमें महेश्वर लिंग के भीतर प्रकट हुए। ब्रह्मा और विष्णु ने वेद-वाक्य से शिव को यथावत् जानकर वैदिक मंत्रों से देवेश्वर महादेव की स्तुति की। उनके स्तवन से प्रसन्न होकर मायारहित महेश्वर दिव्य शब्दमय रूप धारण करके हँसते हुए लिंग में प्रकट हुए। आगे उनके मस्तक, ललाट, नेत्र, कान, कपोल, नासापुट, ओष्ठ, दंत-पंक्ति, हाथ, पैर, उदर, हृदय, धातु, आत्मा और क्रोध तक को अक्षरों से संबद्ध बताया गया है।
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