विस्तृत उत्तर
नमः शिवाय' को 'पंचाक्षर मंत्र' कहते हैं। जब इसके आदि में प्रणव अर्थात 'ॐ' जोड़ दिया जाता है, तब यह 'षडाक्षर मंत्र' बन जाता है।
षडाक्षर मंत्र क्या होता है को संदर्भ सहित समझें
षडाक्षर मंत्र क्या होता है का सबसे सीधा सार यह है: जब 'नमः शिवाय' के आदि में प्रणव 'ॐ' जोड़ा जाता है तब 'ॐ नमः शिवाय' बनता है जिसे 'षडाक्षर मंत्र' (छह अक्षरों वाला) कहते हैं।
षडाक्षर मंत्र और गुरु दीक्षा जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का क्या रहस्य है?
'ॐ नमः शिवाय' = सनातन धर्म का सबसे पवित्र पंचाक्षरी मंत्र। उत्पत्ति: कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता (श्री रुद्रम्)। 'ॐ' में ब्रह्मा-विष्णु-रुद्र की एकता। भाव: जीव और परब्रह्म में कोई भेद नहीं। यह समस्त क्लेश दग्ध कर परम ज्ञान देता है।
मार्कण्डेय पुराण में ॐ और त्रैलोक्य का समन्वय कैसे किया गया है?
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार ॐ के 'अ' = भूलोक, 'उ' = भुवर्लोक और 'म' = स्वर्लोक। भुवर्लोक परब्रह्म का मध्यवर्ती कंपन है, कोई अलग इकाई नहीं।
गायत्री मंत्र के साथ ॐ का उच्चारण क्यों
ॐ (प्रणव) संपूर्ण ध्वनियों का मूल और निर्गुण परब्रह्म का प्रतीक है। बिना ॐ के वैदिक मंत्र सिर विहीन शरीर के समान निष्फल माने जाते हैं; ॐ मंत्र की ऊर्जा को ब्रह्मांड से जोड़ता है।
अकार, उकार, मकार क्या हैं?
अकार को परमात्मा, उकार को आदिदेव विद्यादेह और मकार को परमात्मा शिव कहा गया है।
आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?
स्वर्ण अंड के ऊपरी पवित्र कपाल से आकाश और नीचे के भाग से पाँच लक्षणों वाली पृथ्वी की उत्पत्ति बताई गई है।
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