विस्तृत उत्तर
शैव दर्शन, विशेषकर कश्मीर शैव संप्रदाय, में शिव और शक्ति का संबंध प्रकाश और विमर्श का माना जाता है।
शिव निष्क्रिय, अपरिवर्तनीय परम चेतना हैं, जबकि शक्ति उनकी क्रियाशील, सृजनशील ऊर्जा है। दोनों एक-दूसरे से अभिन्न हैं, ठीक वैसे ही जैसे सूर्य और उसका प्रकाश, या अग्नि और उसका ताप।
शिव और शक्ति का आश्रय एक-दूसरे पर है; वे पूर्ण रूप से पूरक हैं और दोनों की ही स्तुति अनिवार्य है।





