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विस्तृत उत्तर
शैवी दीक्षा के बारे में यहाँ अलग विधि-विधान नहीं बताया गया है। पाठ में केवल इतना स्पष्ट कहा गया है कि योगाचार्यों के महात्मा शिष्य शैवी दीक्षा से सम्पन्न थे। इन्हीं शिष्यों को विमल आत्मा, सिद्ध, ब्रह्मनिष्ठ, ज्ञान और योग में निरत रहनेवाला तथा भस्म-विभूषित शरीर वाला कहा गया है। इसलिए शैवी दीक्षा इस शिष्य-परम्परा का एक गुण रूप में आती है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 40, श्लोक 37-52
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