विस्तृत उत्तर
शरीर को नश्वर बताने के लिये बहुत स्पष्ट चित्र दिया गया है। कहा गया है कि मोह से शरीर को पुष्ट, सुंदर और बलवान बना लेने पर भी यदि श्रीमद्भागवत कथा न सुनी, तो क्या लाभ। शरीर की अस्थियाँ आधार-स्तंभ हैं, नस-नाड़ियों की रस्सियों से वह बँधा है, उस पर मांस और रक्त चढ़ा है और ऊपर से चर्म लगा है। उसके प्रत्येक अंग से गंध आती है, क्योंकि वह मल-मूत्र का पात्र है। वृद्धावस्था, शोक, रोग, कामना और दोषों से वह पीड़ित रहता है। अंत में गाड़ा जाए तो कीड़े बनता है, पशु खा ले तो विष्ठा बनता है और जलाया जाए तो भस्म हो जाता है। ऐसे शरीर को स्थायी मानना उचित नहीं कहा गया।
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