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विस्तृत उत्तर
माहेश्वर ज्ञान शिष्य-परम्परा के माध्यम से फैला। पाठ में कहा गया है कि वह ज्ञान क्रमशः शिष्य-परम्परा के द्वारा ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों को भगवान् शिव की कृपा से उनके मुख से प्राप्त हुआ। इससे स्पष्ट है कि ज्ञान केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गुरु-शिष्य क्रम में आगे बढ़ा और वर्णों के योग्य लोगों तक पहुँचा।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 37, श्लोक 10
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