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विस्तृत उत्तर
शिव की भक्ति और प्राणायाम से पाप दूर होने का वर्णन शरणागति के रूप में आता है। मुनि परम भक्ति से सद्योजात महेश्वर की स्तुति करके उनकी शरण में गए। आगे कहा गया है कि जो प्राणी प्राणायामपरायण होकर ब्रह्मतत्परचित्त से विश्वेश्वरदेव की शरण लेते हैं, वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं। इसलिए प्राणायाम, ब्रह्मनिष्ठ चित्त और शिवशरणागति पापमुक्ति का कारण बताए गए हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 11, PDF पृष्ठ 63, श्लोक 9-11
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