विस्तृत उत्तर
विभूति और भस्म दोनों शिव पूजा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, किन्तु इनमें सूक्ष्म अंतर है:
भस्म (Ash)
- ▸किसी भी वस्तु के जलने के बाद बची राख।
- ▸शिव पूजा में यज्ञ/हवन की भस्म प्रयोग होती है।
- ▸गोमय (गोबर) से बनी भस्म सर्वोत्तम।
- ▸भस्म = नश्वरता का प्रतीक — शरीर अंततः भस्म होगा।
- ▸शिव श्मशान में भस्म लगाते हैं = वैराग्य।
विभूति (Sacred Ash/Vibhuti)
- ▸विशेष विधि से तैयार पवित्र भस्म।
- ▸गोमय (गोबर), अग्निहोत्र की भस्म, या विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित भस्म = विभूति।
- ▸'विभूति' = ऐश्वर्य, दिव्य शक्ति। शिव की विभूति = ईश्वरीय ऐश्वर्य।
- ▸विभूति में मंत्र-शक्ति और दिव्यता होती है।
मुख्य अंतर
- ▸भस्म = सामान्य पवित्र राख। विभूति = मंत्राभिमंत्रित/विधिपूर्वक तैयार विशेष भस्म।
- ▸भस्म = वैराग्य प्रतीक। विभूति = ऐश्वर्य + वैराग्य दोनों।
- ▸सभी विभूति भस्म है, किन्तु सभी भस्म विभूति नहीं।
तिलक (त्रिपुण्ड्र) विधि
तीन अंगुलियों (तर्जनी, मध्यमा, अनामिका) से माथे पर तीन क्षैतिज (horizontal) रेखाएँ लगाएँ = त्रिपुण्ड्र। तीन रेखाएँ = ब्रह्मा-विष्णु-महेश / सत्व-रज-तम / इच्छा-ज्ञान-क्रिया।
मंत्र: 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' या 'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए भस्म/विभूति लगाएँ।





