विस्तृत उत्तर
शिवलिंग का आदि और अंत इसलिए नहीं मिला क्योंकि वह स्वयं आदि-मध्य-अन्त से हीन बताया गया है। उसका स्वरूप क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त, अवर्णनीय, कालाग्नि के समान ज्योतिर्मय और विश्व की उत्पत्ति से सम्बद्ध था। विष्णु नीचे मूल की खोज में गए और ब्रह्मा ऊपर अंत जानने गए। बहुत प्रयास के बाद भी विष्णु मूल का अल्पांश नहीं देख सके और ब्रह्मा अंत न देखकर लौट आए। दोनों ने लौटकर परमेश्वर को प्रणाम किया और उस अनन्त तत्त्व पर विचार किया।
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