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लिंग तत्त्व📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 17, PDF पृष्ठ 78-79, श्लोक 33-48⏱ 1 मिनट पठन

शिवलिंग का आदि और अंत क्यों नहीं मिला?

अंतिम अपडेट: 30 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

लिंग क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त और आदि-मध्य-अन्त से हीन था, इसलिए उसका मूल या अंत नहीं मिला।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग का आदि और अंत इसलिए नहीं मिला क्योंकि वह स्वयं आदि-मध्य-अन्त से हीन बताया गया है। उसका स्वरूप क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त, अवर्णनीय, कालाग्नि के समान ज्योतिर्मय और विश्व की उत्पत्ति से सम्बद्ध था। विष्णु नीचे मूल की खोज में गए और ब्रह्मा ऊपर अंत जानने गए। बहुत प्रयास के बाद भी विष्णु मूल का अल्पांश नहीं देख सके और ब्रह्मा अंत न देखकर लौट आए। दोनों ने लौटकर परमेश्वर को प्रणाम किया और उस अनन्त तत्त्व पर विचार किया।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 17, PDF पृष्ठ 78-79, श्लोक 33-48
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

शिवलिंग का आदि और अंत क्यों नहीं मिला को संदर्भ सहित समझें

शिवलिंग का आदि और अंत क्यों नहीं मिला का सबसे सीधा सार यह है: लिंग क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त और आदि-मध्य-अन्त से हीन था, इसलिए उसका मूल या अंत नहीं मिला।

लिंग तत्त्व जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 17, PDF पृष्ठ 78-79, श्लोक 33-48 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 17, PDF पृष्ठ 78-79, श्लोक 33-48 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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