विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत में हंस अवतार का वर्णन एकादश स्कंध में आता है। भगवान श्रीकृष्ण उद्धव को बताते हैं कि सनकादिक मुनियों ने ब्रह्मा जी से पूछा कि मन विषयों में और विषय मन में गहराई से प्रविष्ट हो गए हैं, ऐसे में मोक्ष चाहने वाला साधक इस बंधन को कैसे काटे। ब्रह्मा जी इस प्रश्न का समाधान न कर सके और उन्होंने भगवान का ध्यान किया। तब भगवान विष्णु हंस रूप में प्रकट हुए। मुनियों ने पूछा, आप कौन हैं? भगवान ने अद्वैत आत्मतत्त्व समझाते हुए कहा कि आत्मा के स्तर पर भेद नहीं है। यही संवाद हंस गीता कहलाता है।
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