विस्तृत उत्तर
सिद्धियों का त्याग करने से महेश्वर प्रसन्न होते हैं क्योंकि साधक चित्त को विषयभोगों से हटाकर समस्त विघ्नरूप ब्राह्म ऐश्वर्यों को छोड़ देता है। पाठ में कहा गया है कि भुवनों में स्थित इन औपसर्गिक ऐश्वर्यों का त्याग करने से महेश्वर प्रसन्न होते हैं। जब साधक परम वैराग्य से शिव को प्रसन्न करता है, तब उसे विमल मुक्ति प्राप्त होती है। इसलिए त्याग को शिवप्रसाद और मुक्ति से जोड़ा गया है।
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