विस्तृत उत्तर
सीता-राम का प्रथम मिलन (दर्शन) जनकपुर के राजकीय बाग — पुष्पवाटिका में हुआ।
रामजी गुरु विश्वामित्रजी की आज्ञा से लक्ष्मणजी के साथ फूल लेने बाग में गये। सीताजी माता के कहने पर गिरिजा (पार्वती) पूजन के लिये उसी बाग में आयीं। वहीं पुष्पवाटिका में दोनों ने एक-दूसरे को पहली बार देखा।
चौपाई — 'अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा। सिय मुख ससि भए नयन चकोरा' — रामजी ने उस ओर देखा, सीताजी के मुखरूपी चन्द्रमा के लिये नेत्र चकोर बन गये।





