विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के अनुसार, जो फल सहस्त्र (हजार) करोड़ शिवलिंगों का पूजन करने पर प्राप्त होता है, वह अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के 'दर्शन मात्र' से साधक को मिल जाता है।
स्कंद पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है को संदर्भ सहित समझें
स्कंद पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है का सबसे सीधा सार यह है: स्कंद पुराण कहता है कि हजार करोड़ शिवलिंगों की पूजा का अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।
शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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'धर्मार्थकाममोक्षाख्या' श्लोक का क्या अर्थ है?
'धर्मार्थकाममोक्षाख्या...' का अर्थ: रसराज (पारद) की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है, इसमें लेशमात्र संदेह नहीं।
वायवीय संहिता में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?
वायवीय संहिता के अनुसार आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य और अन्य सभी अभिलाषाएं रसलिंग (पारद शिवलिंग) के पूजन से सहज ही प्राप्त हो जाती हैं।
रसार्णव तंत्र में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?
रसार्णव तंत्र कहता है: 'रसराज (पारद) की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है, इसमें लेशमात्र संदेह नहीं।'
ब्रह्मवैवर्त पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?
ब्रह्मवैवर्त पुराण: एक बार भी विधिपूर्वक पारद शिवलिंग का पूजन करने वाला जब तक सूर्य-चंद्र हैं तब तक पूर्ण सुख पाता है और अंततः मोक्ष प्राप्त करता है।
शिव पुराण में रावण और पारद शिवलिंग का क्या संबंध है?
शिव पुराण की रुद्र संहिता के अनुसार लंकापति रावण — महान तांत्रिक और उच्च कोटि के रसायन शास्त्री — ने पारद शिवलिंग का निर्माण और पूजन करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था।
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