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हवन एवं यज्ञ📜 कात्यायन श्रौतसूत्र, आपस्तम्ब श्रौतसूत्र, शतपथ ब्राह्मण, विकिस्रोत (अतीत-स्मृति)2 मिनट पठन

सोमयाग क्या है और कैसे किया जाता है

संक्षिप्त उत्तर

सोमयाग = सोमरस से आहुति वाला श्रेष्ठ वैदिक यज्ञ। 7 प्रकार: अग्निष्टोम सबसे मूल। 16 ऋत्विज्, वसन्त ऋतु में। क्रम: दीक्षा → सोम क्रय → सोमरस निष्कासन (तीन सवन) → सामगान → आहुति → सोमपान → दक्षिणा → अवभृथ स्नान। राजसूय, अश्वमेध भी सोमयाग श्रेणी। आज अत्यन्त दुर्लभ।

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विस्तृत उत्तर

सोमयाग वैदिक श्रौत यज्ञों में सर्वाधिक प्रतिष्ठित और विस्तृत यज्ञ है। इसमें सोमरस (सोमलता का रस) निकालकर अग्नि में आहुति दी जाती है और ऋत्विज् तथा यजमान सोमपान करते हैं।

प्रकार

सोमयज्ञ मुख्यतः 7 प्रकार का है:

  1. 1अग्निष्टोम (सबसे मूलभूत)
  2. 2अत्यग्निष्टोम
  3. 3उक्थ
  4. 4षोडशी
  5. 5वाजपेय
  6. 6अतिरात्र
  7. 7आप्तोर्याम

राजसूय और अश्वमेध भी सोमयाग की श्रेणी में आते हैं।

अवधि

  • एकाह: एक दिन में पूर्ण (जैसे अग्निष्टोम)
  • आहीन: 2-12 दिन
  • सत्र: एक पक्ष (15 दिन) या अधिक

समय

कात्यायन सूत्र और आपस्तम्ब सूत्र: 'वसन्ते अग्निष्टोमः' — वसन्त ऋतु सोमयाग का उचित समय है, क्योंकि इसी ऋतु में सोमलता प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है।

ऋत्विज्

16 ऋत्विज् — चारों वेदों के 4-4 प्रतिनिधि (होता, अध्वर्यु, उद्गाता, ब्रह्मा और उनके सहायक)।

मुख्य क्रम (अग्निष्टोम — संक्षिप्त)

  1. 1दीक्षा: यजमान और पत्नी व्रत लेते हैं।
  2. 2प्रवर्ग्य और उपसद: प्रारम्भिक अनुष्ठान।
  3. 3सोम क्रय: सोमलता का विधिपूर्वक क्रय।
  4. 4सुत्या (सोमरस निष्कासन): पत्थरों (ग्रावन्) से सोमलता कूटकर रस निकालना — यह तीन सवनों (प्रातः, माध्यन्दिन, सायं) में होता है।
  5. 5प्रत्येक सवन में सामगान, शस्त्र पाठ (ऋग्वेदी), और आहुति।
  6. 6सोमपान: ऋत्विज् और यजमान सोमरस का पान।
  7. 7दक्षिणा: यजमान ऋत्विजों को दक्षिणा देता है (गायें, सोना, वस्त्र आदि)।
  8. 8अवभृथ स्नान: समापन स्नान।

देवता

सूर्य, अग्नि, इन्द्र, वायु, मित्र, वरुण, अश्विनीकुमार, विश्वेदेव आदि।

वर्तमान स्थिति

सोमयाग आज अत्यन्त दुर्लभ है। केरल में नम्बूदिरी ब्राह्मणों द्वारा कभी-कभी इसका आयोजन होता है। 1975 और 2011 में केरल में अग्निष्टोम/अतिरात्र सोमयाग सम्पन्न हुए जो अन्तर्राष्ट्रीय ध्यान का केन्द्र बने।

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शास्त्रीय स्रोत
कात्यायन श्रौतसूत्र, आपस्तम्ब श्रौतसूत्र, शतपथ ब्राह्मण, विकिस्रोत (अतीत-स्मृति)
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