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विस्तृत उत्तर
सृष्टि और प्रलय का कारण गुणों से जोड़ा गया है। गुणों की विषमता से सृष्टि होती है और गुणों के साम्य से प्रलय होता है। इन दोनों का हेतु महेश्वर बताए गए हैं। देवाधिदेव महेश्वर अपनी लीला से असंख्य सृष्टि करते हैं और वे सर्ग प्रधान से अन्वधिष्ठित होते हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 28, श्लोक 52-53 1/2
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