विस्तृत उत्तर
प्रजासृष्टि से पहले की स्थिति जलमय बताई गई है। पीतकल्प के बीत जाने के बाद ब्रह्मा का असित कल्प प्रवृत्त हुआ। उस समय एक हजार दिव्य वर्षों तक सर्वत्र जल ही जल व्याप्त रहा। इस अवस्था को देखकर ब्रह्मा अत्यन्त दुःखित हुए और प्रजासृष्टि की इच्छा से विचारमग्न हो गये। इसलिए यहाँ सृष्टि-प्रारम्भ से जुड़ा दृश्य जल की व्यापकता, ब्रह्मा की चिंता और प्रजा उत्पन्न करने की इच्छा से जुड़ा है।
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