विस्तृत उत्तर
तमस्, मोह और महा-मोह पंचपर्वा अविद्या के तीन प्रमुख रूप हैं। तमस् वह अज्ञान है जिसमें जीव अपने आत्मस्वरूप को भूलकर स्वयं को केवल शरीर मानता है। मोह तब उत्पन्न होता है जब जीव शरीर से जुड़े परिवार, वस्तु, जाति, राष्ट्र और संबंधों को मेरा मानने लगता है। महा-मोह इससे भी गहरी अवस्था है, जहाँ जीव भोग, ऐश्वर्य, सत्ता और सुख की अंधी दौड़ में पागल हो जाता है। ये तीनों मिलकर जीव को जन्म-मरण के चक्र में बाँधते हैं। हंस अवतार का ज्ञान इन बंधनों को मिथ्या दिखाकर आत्मा की साक्षी अवस्था में स्थापित करता है।
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