विस्तृत उत्तर
हवन में तीन आचमन मंत्रों का अर्थ इस प्रकार है:
प्रथम आचमन: 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' — हे अविनाशी परमात्मन्! आप मेरे आधार हैं, यह जल अमृत के समान मेरे अंतःकरण को शुद्ध करे।
द्वितीय आचमन: 'ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा' — हे प्रभो! आप मेरे रक्षक हैं।
तृतीय आचमन: 'ॐ सत्यं यशः श्रीर्मयि श्रीः श्रयतां स्वाहा' — मुझमें सत्य, यश और लक्ष्मी सदैव निवास करें।





