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विस्तृत उत्तर
तीन गुणों वाली प्रकृति को अजा स्वरूपिणी कहा गया है। वह रक्तवर्णा यानी रजोगुणवाली, शुक्लवर्णा यानी सत्त्वगुणवाली और कृष्णवर्णा यानी तमोगुणवाली बताई गई है। वही बहुविध प्रजाओं की उत्पत्ति करती है। बद्ध जीव प्रेमपूर्वक उसकी सेवा करता हुआ उसका अनुसरण करता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 21-22, श्लोक 13
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