विस्तृत उत्तर
तिलक सनातन धर्म में माथे पर आत्मा के उर्ध्वगामी होने का प्रतीक है। शास्त्रों में मानव शरीर को मन्दिर की उपमा दी गई है और माथा उसका सर्वोच्च भाग — इसीलिए तिलक को 'शिखर' की सज्जा कहा जाता है। आज्ञाचक्र पर तिलक लगाने से एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, ऐसी परम्परागत मान्यता है।
तिलक धारण करते समय पढ़े जाने वाले मुख्य मंत्र:
१. चंदन तिलक का मंत्र:
ॐ चन्दनस्य महत्पुण्यं पवित्रं पापनाशनम्।
आपदां हरते नित्यं लक्ष्मीस्तिष्ठति सर्वदा॥
अर्थ: चंदन महान पुण्यदायी, पवित्र और पापनाशक है। यह नित्य आपत्तियाँ हरता है और जहाँ यह लगाया जाता है वहाँ लक्ष्मी सदा विराजमान रहती हैं।
२. वैष्णव तिलक मंत्र:
केशवानन्त गोविन्द वाराह पुरुषोत्तम।
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु॥
कान्ति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम्।
ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम्॥
अर्थ: हे केशव, अनन्त, गोविन्द, वाराह, पुरुषोत्तम! यह तिलक मुझे पुण्य, यश और आयु दे। यह चंदन मुझे कान्ति, लक्ष्मी, धैर्य, सुख, सौभाग्य और बल प्रदान करे।
३. स्वस्ति-तिलक (आचार्य यजमान को लगाएं):
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥





