विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में विभिन्न प्रकार की बाधाओं (तांत्रिक, ग्रह-जनित, भूत-प्रेत, नज़र दोष आदि) से मुक्ति के लिए अनेक प्रभावी मंत्र बताए गए हैं।
सर्वाधिक प्रभावी बाधा-मुक्ति मंत्र
1महामृत्युंजय मंत्र (सर्वश्रेष्ठ)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।'
- ▸जप संख्या: 108/1008/1,25,000
- ▸सर्वप्रकार की बाधा, रोग, भय, और मृत्यु-भय से रक्षा
- ▸ऋग्वेद और यजुर्वेद दोनों में वर्णित
2नवार्ण मंत्र (दुर्गा)
'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'
- ▸जप: 108 बार नित्य
- ▸तांत्रिक बाधा और शत्रु बाधा में अत्यन्त प्रभावी
3काल भैरव मंत्र
'ॐ ह्रां ह्रीं हुं काल भैरवाय नमः'
- ▸जप: 108 बार
- ▸भूत-प्रेत बाधा और तांत्रिक अभिचार से रक्षा
- ▸शनिवार/मंगलवार रात्रि विशेष
4हनुमान बीज मंत्र
'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हनुमते रामदूताय लंकाविध्वंसनाय...
अंजनीसुताय महाबलपराक्रमाय...'
- ▸सभी बाधाओं में तत्काल प्रभावी
- ▸हनुमान चालीसा और बजरंग बाण सरलतम विकल्प
5प्रत्यंगिरा मंत्र
'ॐ क्षं प्रत्यंगिरायै नमः'
- ▸अभिचार (काले जादू) के विपरीत प्रभाव — पलटवार मंत्र
- ▸केवल गुरु-दीक्षा से जपें
6सुदर्शन मंत्र
'ॐ सुदर्शनाय विद्महे महाज्वालाय धीमहि, तन्नो चक्रं प्रचोदयात्'
- ▸विष्णु के सुदर्शन चक्र का मंत्र — सर्वबाधा कटक
7दुर्गा कवच (दुर्गा सप्तशती से)
सम्पूर्ण दुर्गा कवच का पाठ — शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा का विधान।
8गायत्री मंत्र
'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं...'
- ▸नित्य 108 बार जप — सभी प्रकार की बाधाओं से स्वतः रक्षा
जप विधि (सामान्य नियम)
- ▸प्रातःकाल या सायंकाल
- ▸स्नान कर शुद्ध वस्त्र में बैठें
- ▸रुद्राक्ष या तुलसी माला से जप
- ▸पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख
- ▸नित्य एक ही समय पर जप करें
सावधानी
बाधा-मुक्ति मंत्रों का दुरुपयोग (किसी को हानि पहुँचाने के लिए) वर्जित है। केवल रक्षात्मक भाव से ही इनका जप करें।
