विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में 'भैरवी' शब्द बहुआयामी है और अनेक अर्थों में प्रयुक्त होता है।
भैरवी के विभिन्न अर्थ
1शाब्दिक अर्थ
भैरवी' = भय का नाश करने वाली। 'भैरव' (शिव का उग्र रूप) की शक्ति = भैरवी। वह देवी जिसके दर्शन मात्र से काल भी भयभीत हो जाए।
2दशमहाविद्या में भैरवी
त्रिपुर भैरवी दस महाविद्याओं में पाँचवें (कुछ परम्पराओं में छठे) स्थान पर हैं। ये महाशक्ति दुर्गा का उग्र रूप हैं। शास्त्रों में इनके अनेक स्वरूप बताए गए हैं — त्रिपुरा भैरवी, चैतन्य भैरवी, सिद्ध भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, रुद्र भैरवी आदि।
3तांत्रिक साधिका के रूप में भैरवी
तंत्र ग्रंथों में दीक्षित तंत्र-मार्गी स्त्री को 'भैरवी' और पुरुष को 'भैरव' कहा जाता है। भगवान शिव स्वयं पार्वती को 'भैरवी' सम्बोधित करते हैं। इस अर्थ में भैरवी = माँ, शक्ति, शिव की संगिनी।
4भैरवी चक्र (साधना पद्धति)
भैरवी चक्र दो प्रकार के होते हैं — चीनाचारा चक्र और शैवमतीय चक्र। भैरवी चक्र पूजा हिमालय क्षेत्र (कुल्लू) से आरम्भ हुई। बाद में इसमें पंचमकारों को जोड़ा गया।
5भैरवी साधना (उच्चकोटि की तांत्रिक साधना)
तंत्र में भैरवी साधना एक उच्च-स्तरीय साधना है। कुलार्णव तंत्र के अनुसार, तंत्र में प्रवेश के बाद साधक को किसी न किसी चरण में भैरवी (शक्ति) का साहचर्य ग्रहण करना अनिवार्य होता है। यह शक्ति-तत्व के साक्षात्कार की साधना है।
6विज्ञान भैरव तंत्र में भैरवी
कश्मीर शैव परम्परा का यह 163 श्लोकों का ग्रंथ भगवान भैरव और माँ भैरवी के संवाद रूप में है। इसमें आत्मबोध की 112 ध्यान विधियाँ बताई गई हैं। यहाँ भैरवी = देवी शक्ति जो ईश्वर का प्रवेशद्वार हैं।
भैरवी साधना का महत्व
भैरवी साधना श्मशान पीठ और श्यामा पीठ साधना की श्रेणी में आती है। जब गुरु से भैरवी साधना का संकेत प्राप्त हो, तब साधक समझे कि गुरु उसे तंत्र की उच्च भावभूमि पर ले जाना चाहते हैं।
सावधानी
भैरवी साधना केवल गुरु-निर्देशन में ही सम्भव है। बिना दीक्षा और मार्गदर्शन के यह साधना करना वर्जित है।
