विस्तृत उत्तर
काम्य कर्म = विशिष्ट कामना (इच्छा) पूर्ति हेतु किए जाने वाले कर्म:
तीन प्रकार के कर्म
- 1नित्य: अनिवार्य दैनिक (संध्या, जप) — न करने = पाप।
- 2नैमित्तिक: विशेष अवसर (नवरात्रि, श्राद्ध) — अवसर = अनिवार्य।
- 3काम्य: इच्छानुसार — करने = विशेष फल, न करने = कोई दोष नहीं।
काम्य कर्म उदाहरण
- ▸धन प्राप्ति: लक्ष्मी/कुबेर अनुष्ठान।
- ▸संतान: संतान गोपाल मंत्र।
- ▸विवाह: कात्यायनी व्रत (भागवत 10.22)।
- ▸रोग मुक्ति: महामृत्युंजय अनुष्ठान।
- ▸शत्रु नाश: बगलामुखी/प्रत्यंगिरा।
- ▸ग्रह शांति: विशिष्ट ग्रह मंत्र अनुष्ठान।
गीता दृष्टि: 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' — कर्म करो, फल की चिंता छोड़ो। निष्काम कर्म > काम्य कर्म।
तंत्र: काम्य कर्म = मान्य (भोग से योग)। परंतु अंतिम लक्ष्य = मोक्ष, भोग नहीं।
