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तंत्र शास्त्र📜 धर्मशास्त्र, तंत्र शास्त्र, गीता1 मिनट पठन

तंत्र में काम्य कर्म क्या होते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

काम्य = इच्छापूर्ति कर्म (करें=फल, न करें=दोष नहीं)। उदाहरण: लक्ष्मी (धन), संतान गोपाल, महामृत्युंजय (रोग), बगलामुखी (शत्रु)। गीता: निष्काम > काम्य। तंत्र: काम्य मान्य (भोग से योग), अंतिम लक्ष्य = मोक्ष।

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विस्तृत उत्तर

काम्य कर्म = विशिष्ट कामना (इच्छा) पूर्ति हेतु किए जाने वाले कर्म:

तीन प्रकार के कर्म

  1. 1नित्य: अनिवार्य दैनिक (संध्या, जप) — न करने = पाप।
  2. 2नैमित्तिक: विशेष अवसर (नवरात्रि, श्राद्ध) — अवसर = अनिवार्य।
  3. 3काम्य: इच्छानुसार — करने = विशेष फल, न करने = कोई दोष नहीं।

काम्य कर्म उदाहरण

  • धन प्राप्ति: लक्ष्मी/कुबेर अनुष्ठान।
  • संतान: संतान गोपाल मंत्र।
  • विवाह: कात्यायनी व्रत (भागवत 10.22)।
  • रोग मुक्ति: महामृत्युंजय अनुष्ठान।
  • शत्रु नाश: बगलामुखी/प्रत्यंगिरा।
  • ग्रह शांति: विशिष्ट ग्रह मंत्र अनुष्ठान।

गीता दृष्टि: 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' — कर्म करो, फल की चिंता छोड़ो। निष्काम कर्म > काम्य कर्म।

तंत्र: काम्य कर्म = मान्य (भोग से योग)। परंतु अंतिम लक्ष्य = मोक्ष, भोग नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मशास्त्र, तंत्र शास्त्र, गीता
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