विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना में वर्जित बातों का वर्णन कुलार्णव तंत्र में विस्तार से है:
साधना काल में वर्जित — आचरण
- 1मांसाहार और मद्यपान — भक्ति/दक्षिणाचार साधना में सर्वथा वर्जित
- 2प्याज-लहसुन — तामसिक
- 3असत्य वचन — मंत्र की शक्ति नष्ट होती है
- 4क्रोध — साधना के दिन
- 5हिंसा — किसी को शारीरिक या मानसिक कष्ट न दें
साधना के तुरंत पहले और बाद
- 1भोजन के तुरंत बाद जप न करें — 2 घंटे का अंतर
- 2शौच के तुरंत बाद — स्नान या हाथ धोने के बाद ही जप
- 3थकान में — अत्यधिक थका होने पर जप की गुणवत्ता नहीं
मानसिक वर्जन
- 1अश्रद्धा — 'क्या फर्क पड़ेगा' सोचकर जप
- 2चंचल मन — अन्यत्र ध्यान देते हुए जप
- 3घमंड — साधना या सिद्धि का अहंकार
- 4डर — उग्र देवी से अनावश्यक भय
सामाजिक वर्जन
- 1साधना का प्रदर्शन — सिद्धि बताना, डींग मारना
- 2मंत्र बेचना — पैसे लेकर मंत्र देना
- 3गुरु निंदा — अपने गुरु की बुराई
- 4देव निंदा
कुलार्णव तंत्र का वचन
साधको यः करोत्येतान् दोषान् साधनकाले स्वयम्। तस्य साधनं विफलं, स न सिद्धिं लभेत् कदा।' — जो साधक इन दोषों को करता है, उसकी साधना विफल होती है और सिद्धि नहीं मिलती।





