विस्तृत उत्तर
तुलसी माता को देवी वृंदा का पवित्र रूप माना जाता है। वृंदा जालंधर की पत्नी और भगवान विष्णु की परम भक्त थी। उसके पतिव्रत, त्याग और भक्ति ने उसे अमर बना दिया। जब वृंदा ने अग्नि-समाधि ली, तब उसकी भस्म से तुलसी पौधे का प्राकट्य हुआ। भगवान विष्णु ने तुलसी को अपनी पूजा में अनिवार्य स्थान दिया और कहा कि तुलसी दल के बिना उनका भोग स्वीकार नहीं होगा। इसीलिए तुलसी माता को घर-घर में पूजनीय माना जाता है। वे पवित्रता, भक्ति, पतिव्रत, स्वास्थ्य और वैष्णव धर्म की जीवंत प्रतीक हैं।
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