विस्तृत उत्तर
तुलसी विवाह वृंदा और भगवान विष्णु के पवित्र संबंध की स्मृति में किया जाता है। वृंदा ने विष्णु को पाषाण बनने का श्राप दिया और बाद में स्वयं तुलसी रूप में प्रकट हुई। विष्णु ने शालिग्राम रूप में उसके साथ सदैव रहने का वरदान दिया। इसी कारण कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थान या प्रबोधिनी एकादशी के समय तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराया जाता है। इस अनुष्ठान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। लोकमान्यता है कि तुलसी विवाह कराने से वैवाहिक सुख, घर में मंगल और कन्यादान के समान पुण्य मिलता है।
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