विस्तृत उत्तर
वामदेव मंत्र पाँच शिव मंत्रों में सामवेद से उत्पन्न बताया गया है। यह रक्तवर्ण, बाल आदि तेरह कलाओं से युक्त, जगत का आदि स्वरूप और वृद्धि-संहार का कारणरूप कहा गया है। इसका वर्णन छाछठ अक्षरों वाले उत्तम मंत्र के रूप में हुआ है। पाठ में इसे वामदेवाय नमो से आरम्भ होने वाले मंत्र के रूप में सूचित किया गया है। विष्णु ने इस मंत्र को ईशान, तत्पुरुष, अघोर और सद्योजात मंत्रों के साथ प्राप्त किया और उनका जप आरम्भ किया।
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