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विस्तृत उत्तर
वामदेव शिव का लाल रूप महातेजस्वी और प्रतापी कुमार के रूप में बताया गया है। वह रक्तवर्ण के भूषण, रक्तवर्ण की माला और रक्तवर्ण के वस्त्र धारण किये हुए था। उसके नेत्र भी रक्तवर्ण के थे। पाठ में पहले कहा गया है कि रक्तकल्प में महान् तेजस्वी ब्रह्मा ने भी रक्तवर्ण धारण किया था। उसी प्रसंग में वामदेव शिव का यह लाल, तेजस्वी और दिव्य कुमाररूप प्रकट हुआ।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 12, PDF पृष्ठ 64, श्लोक 1-3
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