विस्तृत उत्तर
वामदेव शिव की स्तुति ब्रह्मा ने अनेक प्रकार से की। पाठ में कहा गया है कि ब्रह्माजी द्वारा अनेकविध स्तुति किये जाने पर प्रसन्नहृदय परमेश्वर महादेव ने उनसे कहा। शिव ने बताया कि ब्रह्मा ने पुत्र की कामना से ध्यान करते हुए उनका दर्शन प्राप्त किया और परम भक्ति से ब्रह्म अर्थात् 'वामदेवाय' मन्त्र को पूर्व में लगाकर अनेक स्तुतियों से उनका स्तवन किया। इसलिए यह स्तुति भक्ति, ध्यान और वामदेवाय मन्त्र से जुड़ी है।
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