विस्तृत उत्तर
वराह अवतार को भगवान का दूसरा अवतार बताया गया है। संसार के कल्याण के लिए, समस्त यज्ञों के स्वामी भगवान ने सूकर रूप धारण किया। इसका कारण यह बताया गया कि पृथ्वी रसातल में चली गई थी और भगवान ने उसे बाहर निकालने का विचार किया। इसलिए उन्होंने वराह रूप लिया। पाठ में यहाँ वराह लीला का विस्तृत युद्ध-वर्णन नहीं है; केवल इतना बताया गया है कि पृथ्वी को रसातल से निकालने के उद्देश्य से भगवान ने सूकर शरीर स्वीकार किया। इस आधार पर वराह अवतार पृथ्वी के उद्धार और लोक-कल्याण से जुड़ा हुआ है। यह अवतार दिखाता है कि भगवान सृष्टि की रक्षा के लिए आवश्यक रूप धारण करते हैं।
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