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विस्तृत उत्तर
वार्ता सिद्धि दिव्य गन्धों के सूक्ष्म अनुभव से सम्बद्ध है। पाठ में कहा गया है कि बुद्धि के द्वारा दिव्य गन्धों का ठीक-ठीक गन्धतन्मात्रा के रूप में अनुभव कर लेना वार्ता सिद्धि है। यह छह सिद्धियों में तीसरी सिद्धि कही गई है। इसका विषय गन्ध का दिव्य और सूक्ष्म ज्ञान है। अन्य स्वल्प सिद्धियों की तरह यह भी साधना में आकर्षण का कारण बन सकती है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 53, श्लोक 20
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