विस्तृत उत्तर
वेदगर्भ और विश्वगर्भ शिव के नामरूप हैं। विष्णु स्तुति में पहले वेदशास्त्ररूप भुवनेशदेव को नमस्कार करते हैं। फिर धतूरे का बाजूबंद और हार धारण करने वाले, सर्प का जनेऊ, सर्प कुण्डल, सर्प माला और सर्प कटिसूत्र धारण करने वाले शिव को प्रणाम किया गया है। उसी क्रम में शिव को वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ कहा गया है। इससे शिव का संबंध वेद, गर्भित सृष्टि और विश्व के आधाररूप से व्यक्त होता है।
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