विस्तृत उत्तर
वेदों का अंतिम लक्ष्य वासुदेव श्रीकृष्ण बताया गया है। पाठ कहता है कि वेदों का तात्पर्य कृष्ण में ही है। यज्ञों का उद्देश्य भी कृष्ण ही हैं। योग कृष्ण के लिये किए जाते हैं और समस्त कर्मों की परिसमाप्ति भी कृष्ण में होती है। ज्ञान से स्वरूप श्रीकृष्ण की ही प्राप्ति होती है। तपस्या कृष्ण की सत्ता के लिये की जाती है। धर्म का अनुष्ठान कृष्ण के लिये होता है और सब गतियाँ कृष्ण में ही समाप्त हो जाती हैं। इसलिए वेदों को केवल कर्मकांड या दार्शनिक विचार तक सीमित नहीं रखा गया। उनका सार, उद्देश्य और परम लक्ष्य वासुदेव श्रीकृष्ण हैं। यह श्लोकों का बहुत सीधा वासुदेव-केंद्रित निष्कर्ष है।
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