📖
विस्तृत उत्तर
विरक्त व्यक्ति वह है जो प्रतिकूल विषयों पर उद्विग्न नहीं होता और अनुकूल विषयों की प्राप्ति पर हर्षित नहीं होता। पाठ में कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति प्रीति, संताप और विषाद से रहित हो जाता है। उसकी यह विनिवृत्ति ही विरक्तता या विराग कही गई है। इसलिए विराग सुख-दुःख, प्रिय-अप्रिय और अनुकूल-प्रतिकूल में चित्त की समता से जुड़ा है।
📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 26
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?




