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विस्तृत उत्तर
विषय भोगों से मन इसलिए नहीं भरता क्योंकि पाठ में कहा गया है कि विषयों के भोग से इन्द्रियों की तृप्ति नहीं होती। कामनाएँ भोग से शांत नहीं होतीं, बल्कि आहुति डालने पर अग्नि जैसे बढ़ती है, वैसे ही बढ़ती जाती हैं। इसलिए योगी को अमृतत्व की प्राप्ति के लिये भोगों का त्याग करना चाहिए। वैराग्य न होने के कारण मनुष्य अनेक योनियों में जन्म लेता रहता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 43, श्लोक 24-26
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