विस्तृत उत्तर
विशिष्टाद्वैत वेदांत, जिसके प्रमुख प्रणेता श्री रामानुजाचार्य हैं, वैष्णव दर्शन का सबसे सुदृढ़ स्तंभ है। विशिष्टाद्वैत का अर्थ है 'विशेषताओं के साथ अद्वैत' (Qualified Non-Dualism)।
इस मत के अनुसार, भगवान नारायण (विष्णु) ही सर्वोच्च वास्तविकता हैं। वे निर्गुण नहीं हैं, बल्कि 'सगुण' हैं — अर्थात् उनमें अनंत कल्याणकारी गुण (चेतना, आनंद, दया, सर्वव्यापकता) पूर्ण रूप से विद्यमान हैं।
रामानुजाचार्य के अनुसार यह जगत मिथ्या या भ्रम नहीं है। जीव (आत्माएँ) और जगत (प्रकृति) दोनों सत्य हैं और वे भगवान नारायण के ही अंग या शरीर (Body) हैं। जिस प्रकार शरीर और आत्मा का घनिष्ठ संबंध होता है, वैसे ही नारायण आत्मा हैं और यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड उनका शरीर है।





